Tuesday, December 11, 2018

الفالح يبحث مع بيري أوضاع السوق .. والتوقيع على اتفاق «أوبك» في السعودية

بحث وزير الطاقة والصناعة والثروة المعدنية السعودي خالد الفالح أوضاع سوق النفط مع نظيره الأميركي ريك بيري في الظهران في السعودية. وأضاف في تغريدة على موقع «تويتر» أمس، أنهما ناقشا أيضاً «فرص التعاون في المجال التقني بين البلدين».

وأكد وزير الطاقة الإماراتي سهيل المزروعي أن اتفاق التعاون بين «أوبك» والمنتجين المستقلين سيوقّع خلال 3 أشهر في السعودية، وقال: «سننتظر ونرى لنتخذ قراراً بشأن تمديد اتفاق خفض الإنتاج بعد 6 أشهر»، مبيناً أن بلاده ستخفض إمدادات النفط 2.5 في المئة في كانون الثاني (يناير) مقارنة مع مستوى تشرين الأول (أكتوبر).

وقال المزروعي في أبوظبي أمس، إن خروج دولة قطر من منظمة البلدان المصدرة للبترول (أوبك) لن يؤثر على استمرار الإنتاج. وأضاف أن الإمارات لا تفهم قرار قطر بالخروج من المنظمة، التي قال وزير الدولة القطري لشؤون الطاقة الأسبوع الماضي إنه استراتيجية. وتضخ قطر 600 ألف برميل يومياً من النفط، مقارنة مع إنتاج سعودي يصل إلى 11 مليون برميل يومياً.

وارتفعت العقود الآجلة لخام برنت أمس بعدما اتفقت «منظمة البلدان المصدرة للبترول» (أوبك) وبعض المنتجين المستقلين نهاية الأسبوع الماضي على خفض الإمدادات ابتداءً من يناير المقبل. وعلى رغم ذلك، فإن توقعات الأسعار العام المقبل تبقى ضعيفة في ظل حال من التباطؤ الاقتصادي.

من جهته، قال وزير النفط العراقي ثامر الغضبان إنه يتوقع توقف انخفاض أسعار النفط وارتفاعها بمرور الوقت، مضيفاً أنه لو لم تخفض «أوبك» الإنتاج لتراجعت أسعار النفط إلى ما بين 45 و50 دولاراً للبرميل بالنسبة لسلة «أوبك» وجه مدعون في طوكيو أمس اتهامات لشركة «نيسان» ورئيسها السابق كارلوس غصن بالتقليل في دخله في الدفاتر، وجددوا حبسه للاشتباه في ارتكابه مخالفات مالية أخرى. ووجه المدعون اتهامات لـ»نيسان» لنشرها بيانات مالية غير صحيحة، ما يحمّل شركة السيارات اليابانية المسؤولية عن الفضيحة التي هزت قطاع صناعة السيارات.

وألقي القبض على غصن في 19 تشرين الثاني (نوفمبر) الماضي للاشتباه في تخطيطه لتقليل دخله في الدفاتر إلى نحو نصف ما تقاضاه بالفعل خلال 5 أعوام بدءاً من عام 2010، وهو 10 بلايين ين (88 مليون دولار). وغصن محتجز في سجن في طوكيو منذ ذلك الحين لاستجوابه، لكن لم تكن قد وجهت إليه اتهامات رسمية. وجدد الادعاء حبسه أمس لمدة 22 يوماً لمزاعم عن التقليل من دخله في الدفاتر عن ثلاث أعوام أخرى حتى آذار (مارس) الماضي 2018.

وبموجب القانون الياباني، يمكن إعادة اعتقال المشتبه بهم عدة مرات بتهم مختلفة، ما يسمح للمدعين العامين باستجوابهم لفترات طويلة، وهو نظام قضائي تعرض لانتقادات دولية.

وأعلنت «نيسان»، التي أقالت غصن من منصب الرئيس التنفيذي بعد اعتقاله بأيام، أن المخالفة كانت بتدبير منه وبمساعدة المدير التمثيلي السابق للشركة غريغ كيلي الذي وجهت إليه اتهامات مع غصن، حسبما أفادت التقارير. ولم يصدر غصن ولا كيلي أي تصريحات من خلال محاميهما، لكن وسائل إعلام يابانية ذكرت أنهما نفيا الاتهامات. ووفق وكالة أنباء «كيودو»، فقد أقرّ غصن بتوقيع وثائق لتأجيل جزء من راتبه إلى ما بعد إحالته الى التقاعد، لكنه قال إن هذا المبلغ لا يحتاج إلى التصريح عنه لأنه لم يتم تحديده بشكل نهائي.

وذكر مصدر مقرّب من التحقيق أن غصن وكيلي ابتكرا هذا النظام بعد صدور قانون جديد يجبر أعضاء الشركات الذين يتقاضون رواتب مرتفعة على التصريح عنها. ويشتبه في أن غصن قام بتأجيل جزء من دخله لتجنب انتقادات الموظفين والمساهمين لارتفاع راتبه.

وبعد إعلان توجيه اتهامات لـ»نيسان»، أعلنت الشركة أنها تأخذ المسألة بجدية. وقالت في بيان: «نشر بيانات خاطئة في التقارير السنوية للأوراق المالية يضر بشدة بنزاهة بيانات نيسان العامة في أسواق الأوراق المالية والشركة تعرب عن عميق أسفها». وأكدت لجنة مراقبة البورصات والأوراق المالية اليابانية إن الجريمة تصل غرامتها إلى 700 مليون ين (6.21 مليون دولار).

وقال محللون وخبراء قانونيون إنه قد يكون من الصعب على «نيسان» ورئيسها التنفيذي هيروتو سايكاوا تفادي التداعيات، سواء إذا تبين أن مسؤولين آخرين في الشركة كانوا على علم بالمخالفة التي ارتكبها غصن، أو إذا كانت الشركة تفتقر إلى الضوابط الداخلية المناسبة.

وكانت «نيسان» و»ميتسوبيشي»، الشركتان اليابانيتان في التحالف الثلاثي مع «رينو»، عزلتا غصن رجل الأعمال الفرنسي اللبناني البرازيلي من رئاستيهما.وتبدأ المحاكمة في اليابان في محكمة محلية، وبإمكان المدعين والمتهمين الاستئناف بعد صدور الحكم أمام محكمة عليا، لكن ذلك قد يستغرق عدة سنوات قبل التوصل إلى حكم نهائي. وفي حال ادانته قد يواجه غصن عقوبة بالسجن تصل الى 10 سنوات.

Wednesday, November 28, 2018

मारुति स्विफ्ट कार की बिक्री ने 20 लाख का आंकड़ा किया पार

मारुति की प्रमुख ब्रांड स्विफ्ट कार की बिक्री 20 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। इस हैचबैक कार को मई 2005 में लॉन्च किया गया था।
कंपनी की ओर से मंगलवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। स्विफ्ट ने पांच लाख कारों की बिक्री का आंकड़ा सितंबर 2010 में, 10 लाख का आंकड़ा सितंबर 2013 में, 15 लाख का मार्च 2016 में और 20 लाख का आंकड़ा इस साल नवंबर में हासिल किया।
मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक (मार्केटिंग और सेल्स) आर.एस. कलसी ने एक बयान में कहा कि स्विफ्ट की बिक्री का आंकड़ा 20 लाख लाख पहुंचना मील का पत्थर है। देश में बिकने वाली पांच प्रमुख कारों के ब्रांड में स्विफ्ट पिछले एक दशक से प्रमुख ब्रांड बनी हुई है। उन्होंने कहा कि स्विफ्ट कारों के लिए वेटिंग पीरियड कम करने के लिए इसका उत्पादन बढ़ाया गया है।
मारुति सुजुकी ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इस मॉडल का उत्पादन 45 प्रतिशत बढ़ाकर 1.39 लाख यूनिट किया है। इससे वेटिंग पीरियड कम हुआ है। इस मॉडल की बिक्री अप्रैल-अक्टूबर में 36 प्रतिशत बढ़ी जबकि बाजार हिस्सेदारी इस दौरान 29 प्रतिशत रही।
व्यस्त सड़कों के समीप काम करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा अधिक होता है। एक शोध में यह बात प्रकाश में आई है। शोधकतार्ओं ने इस बात से सचेत किया है कि यातायात के कारण होने वाले वायु-प्रदूषण से महिलाओं को स्तन कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है।
स्कॉटलैंड स्थित स्टर्लिंग विश्वविद्यालय के शोधार्थियों की टीम कैंसर की मरीज एक महिला के संबंध में किए गए अध्ययन-विश्लेषण के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि यातायात से दूषित वायु स्तन कैंसर का का कारण बन सकती है। महिला उत्तरी अमेरिका में व्यस्ततम व्यावसायिक सीमा पारगमन पर बतौर सीमा गार्ड के रूप में कार्य करती थी। वह 20 साल तक वहां सीमा गार्ड रहीं। इसी दौरान वह स्तन कैंसर से ग्रस्त हुई थीं।
यह महिला  उन पांच अन्य सीमा गार्डो में एक है, जिन्हें 30 महीने के भीतर स्तन कैंसर हुआ। ये महिलाएं पारगमन के समीप कार्य करती थीं। इसके अलावा इस तरह के सात अन्य मामले दर्ज किए गए।
माइकल गिल्बर्टसन के मुताबिक, निष्कषोर्ं में स्तन कैंसर और स्तन कैंसरकारी तत्व युक्त यातायात संबंधी वायु प्रदूषण के अत्यधिक संपर्क में आने के बीच एक अनौपचारिक संबंध दशार्या गया है। रात के समय कार्य करने और कैंसर के बीच एक संबंध की भी पहचान की गई है।
गिल्बर्टसन ने कहा, “यह नया शोध आम आबादी में स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों में यातायात संबंधी वायु प्रदूषण के योगदान की भूमिका के बारे में संकेत देता है।”
न्यू सॉल्यूशन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि 10,000 मौकों में से एक मामले में यह एक संयोग था क्योंकि यह सभी बहुत हद तक समान थे और आपस में एक दूसरे के करीब थे।

Thursday, September 27, 2018

ब्लॉग: रफ़ाल पर मोदी-अंबानी और दोतरफ़ा नौटंकी में उलझे पांच सवाल

एक शब्द है जवाबदेही, जिसे गुजरात का होने की वजह से मोदी अक्सर 'जवाबदारी' कहते हैं. इसी का एक पर्यायवाची शब्द उत्तरदायित्व भी है.
आसान भाषा में इसका मतलब यह होता है कि जवाब देने का काम किसका है?
रफ़ाल सौदा और उसमें अनिल अंबानी की नई-नवेली कंपनी की भूमिका को लेकर बहुत सारे सवाल उठ रहे हैं जिनकी सीधी 'जवाबदारी' नरेंद्र मोदी की है क्योंकि वे प्रधानमंत्री हैं और इस सौदे पर उन्होंने दस्तख़त किए हैं. साथ ही, इस डील को अंजाम तक पहुंचाने में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर या कैबिनेट की किसी भूमिका के कोई सुराग नहीं हैं.
यही वजह है कि सवाल पीएम मोदी से पूछे जा रहे हैं, लेकिन जवाब उनकी टीम के सदस्य दे रहे हैं, सवालों की शक्ल में या फिर फिकरे कसकर.
पीएम ने मध्य प्रदेश में राहुल गांधी के आरोपों को विदेशी साज़िश करार दिया, लेकिन जवाब तो दूर, रफ़ाल शब्द उनके मुंह से नहीं निकला. यह फिकरा ज़रूर निकला, "जितना कीचड़ उछालेंगे उतना कमल खिलेगा."ह कहने का कोई आधार या सबूत नहीं है कि कोई घोटाला हुआ है या किसी ने रिश्वत ली है, लेकिन यह पूरा मामला राजीव गांधी के कार्यकाल के बोफ़ोर्स घोटाले की तरह परत-दर-परत खुल रहा है.
बोफ़ोर्स मामले में भी यह साबित नहीं हो सका कि वह घोटाला था या राहुल गांधी के पिता ने रिश्वत ली थी.
'चोर' और 'ख़ानदानी चोर' के हो-हल्ले के बीच, न तो सही सवाल सुनाई दे रहे हैं, न ही कोई जवाब मिल रहा है.
सवाल भारत के राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, प्रधानमंत्री के दफ़्तर की गरिमा और पारदर्शिता से जुड़े हैं. मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट के दो मंत्रियों और एक नामी वकील ने इसे 'घोर आपराधिक अनियमितता' बताते हुए, कई सवाल सवाल पूछे हैं.
ऐसे ही सवाल 1980 के दशक में राजीव गांधी से पूछे जा रहे थे, तब उनकी जो प्रतिक्रिया थी, वह बीजेपी के आज के रवैए से बहुत अलग नहीं है.
जैसे व्यक्तिगत तौर पर भ्रष्ट होने के आरोप नरेंद्र मोदी पर नहीं लगे हैं, एक ज़माने में राजीव गांधी को 'मिस्टर क्लीन' कहा जाता था. सबसे पहली प्रतिक्रिया तो यही थी कि गंगा जैसी पवित्र छवि वाले नेता पर ऐसे आरोप लगाने की हिम्मत कैसे हुई?
जिन लोगों की उम्र 45 से ऊपर है, उन्हें शायद याद होगा कि राजीव गांधी ने 1989 के चुनाव में बोफ़ोर्स सौदे पर सवाल उठाने वालों को 'विदेशी ताक़तों का मोहरा' कहा था. ये भी कहा गया था कि भारत तोप ख़रीदकर ताक़तवर न हो जाए इसलिए विपक्ष के 'देश विरोधी' लोग मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं.
आज भी ऐसे ही सुर सुनाई दे रहे हैं. बीजेपी ने संयुक्त संसदीय जांच समिति के गठन से इनकार कर दिया है, ठीक ऐसा ही राजीव गांधी ने भी किया था, हालांकि बाद में उन्हें विपक्ष की इस मांग को मानना पड़ा था.
भारतीय वायु सेना की ज़रूरतों को देखते हुए, फ़्रांसीसी कंपनी डासो एविएशन से 126 विमान ख़रीदे जाने थे. 2012 से मनमोहन सिंह की सरकार से फ़्रांसीसी कंपनी की बातचीत चल रही थी, 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी यह सिलसिला चलता रहा. 2015 में डासो के प्रमुख एरिक ट्रेपिए ने कहा था कि "95 प्रतिशत बातें तय हो गई हैं और जल्दी ही काम शुरू होगा."
प्रधानमंत्री मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को अपनी फ़्रांस यात्रा के दौरान 17 समझौतों पर दस्तख़त किए, जिनमें एक समझौता रफ़ाल विमान की ख़रीद का भी था. फ्रांसीसी कंपनी से ख़रीदे जाने वाले विमानों की संख्या 126 से घटकर अचानक 36 हो गई. सरकार ने अभी तक देश की संसद या मीडिया को नहीं बताया है कि इतना बड़ा बदलाव, कब, क्यों और कैसे हुआ? हले न सिर्फ़ 126 फ़ाइटर जेट ख़रीदे जाने थे बल्कि उनमें से 108 विमान भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र करार के तहत, बेंगलुरू में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) में बनाए जाने वाले थे लेकिन वह इरादा छोड़ दिया गया. सरकारी क्षेत्र की कंपनी एचएएल के पास लड़ाकू विमान बनाने का अच्छा-ख़ासा अनुभव है, टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र के तहत वहाँ पहले भी सैकड़ों जगुआर और सुखोई विमान बनाए गए हैं.
'मेक इन इंडिया' में रक्षा क्षेत्र पर ज़ोर देने की बात कही गई थी और यह उस दिशा में बहुत बड़ा कदम हो सकता था. लंबी प्रक्रिया को पूरा करके, वायु सेना की ज़रूरतों का आकलन करने के बाद ही तय किया गया था कि 126 विमानों की ज़रूरत होगी. क्या भारत की जनता को बताया नहीं जाना चाहिए कि वायु सेना की लड़ाकू विमानों की ज़रूरत कम कैसे हो गई और एचएएल को यह मौका क्यों नहीं दिया गया?

Monday, September 17, 2018

香港会成为“一带一路”绿色融资引擎吗?

近年来,全球“绿色金融”需求增长强劲。作为亚洲的金融中心,香港希望成为中国政府“一带一路”倡议主要的“绿色”资本市场。

“我们看到2018年香港的绿色债券发行量增长了60多亿美元,这已经超过了2017年全年的数额,” 香港财经事务及库务局副局长陈浩濂于6月28日在香港“一带一路”高峰论坛上就绿色金融问题发言时表示。

“这反映了金融市场的实力,以及全球机构对香港成为绿色金融区域中心的信心,”他补充说。

上个月,香港金融管理局宣布了127.4亿美元的政府绿色债券发行计划。

中国是世界上最大的绿色债券市场。去年绿色债券发行量约300亿美元,占全球发行总量的五分之一以上,相比2015年10亿美元的发行量呈显著增长,特别是随着潜在利润丰厚的“一带一路”项目逐步结出丰厚的成果,绿色债券的需求将继续保持强劲。

据亚洲开发银行( )估计,2016年到2030年,全球年基础设施投入将达1.7万亿美元左右。不过,汇丰银行基础设施和房地产集团执行董事乔纳森•德鲁表示,这可能是保守估计。

他表示,“我知道的数据更高。从全球范围来说,大概是七或八[万亿],亚洲则接近五万亿。从这个意义上说,资本量十分巨大,但是对于我们这些金融从业者来讲,真正的挑战是如何将这些资金投入到需要的地方。”

绿色融资机遇

香港铁路有限公司司库彭海兴称,对于港铁这样的机构来说,转向绿色融资合情合理。

“一列火车的运力相当于25辆公共汽车或1500辆汽车。很明显,我们的碳排放量低于其他交通运输方式,”他表示。“我们是一家促进绿色出行的企业,无论我们以何种方式融资,应该都是绿色融资。”

“一带一路”

毕马威“商业报告和可持续发展”合作伙伴吴柏年先生强调称,“一带一路”和绿色金融二者密不可分,可成为促进发展中国家经济增长的方式。
“真正的机会是帮助这些经济体实现低碳经济的跨越式发展。我们已经从西方国家以及中国身上吸取了教训......我们还要重蹈覆辙吗?”他说道。

但并非所有人都和他一样乐观。

“绿洗”的风险

保护生物学家比尔·劳伦斯对“中外对话”表示,“我对当前“一带一路”建设的模式表示担忧,原因有很多,包括所谓的‘绿洗’风险。”劳伦斯是澳大利亚凯恩斯詹姆斯·库克大学的杰出研究学者,也是ALERT(领先环境研究人员和思想家联盟)的创始人和主任。他曾对“一带一路”可能带来的破坏性影响发出过警告,称其为“有史以来环境风险最大的投资”。

他警告说,“在多数情况下,绿色融资和绿色债券的监管都很宽松”,而且在某些情况下,绿色金融是 “对看起来存在很多环境问题的工程进行粉饰”的一种手段。

此外,还存在差异化监管的问题。

欧洲投资银行和中国金融学会绿色金融专业委员会在2017年联合发布的报告中呼吁,要对绿色金融、债券和项目进行统一定义。

目前对绿色债券没有统一的定义,而市场通常认为绿色债券的发行人将利用债券收益来支持保护或改善环境的项目。

而关于于各个国家政策的实施、监管框架,以及围绕绿色工程和绿色融资举措的监督和审查等问题的担忧仍然无解。

即便政府倡导的政策出发点是好的,但项目落实层面仍显不足,在发展中国家更是如此。

当前,“一带一路”东道国在执行环境和社会保障方面负有更大的责任。但是,这些国家的能力往往有限,无法保障强有力的环境监管和社会监督。

Thursday, August 30, 2018

कैसे संभव हुई मेक्सिको के साथ डोनल्ड ट्रंप की डील

अमरीका और मेक्सिको के बीच 25 साल पुराने उत्तर अमरीका मुक्त व्यापार समझौता 'नाफ़्टा' को लेकर नया समझौता करने का दबाव बढ़ने के बाद दोनों देशों के बीच आपसी सहमति बन गई है.
इस समझौते के प्रमुख आलोचकों में शामिल अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को इस मुद्दे पर बड़ी सफ़लता मिलने की बात कही है.
हालांकि, इस समझौते के नए स्वरूप जिस पर अमरीका और मेक्सिको सहमत हुए हैं, उस पर अब तक कनाडा का रुख़ साफ नहीं हुआ है जबकि वह भी इस समझौते का एक हिस्सा है.
नाफ़्टा से बाहर निकलने की धमकी देने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप बीते एक साल से इस मुद्दे पर चर्चाएं कर रहे थे.
ट्रंप ने इस समझौते को नए सिरे से करने की मांग उठाई थी. रंप ने अमरीका के मैन्यूफ़ैक्चरिंग क्षेत्र और ख़ासकर ऑटोमोबाइल क्षेत्र की नौकरियों में कमी के लिए पुराने समझौते को ज़िम्मेदार ठहराया था.
लेकिन इस समझौते पर नई सहमति बनने की ख़बर सामने आने के बाद अमरीकी शेयर और मेक्सिको की मुद्रा मज़बूत हुई थी.
ट्रंप ने नए समझौते के बारे में बताते हुए टीवी पर प्रसारित अपने भाषण में कहा है कि अमरीका और मेक्सिको के बीच जिन शर्तों पर सहमति बनी है उसके बाद ये एक बहुत ही 'बढ़िया समझौता' हो गया है जो कि 'सबके लिए पहले से ज़्यादा समान रूप से हितकारी' होगा.
इस मुद्दे पर काम कर रहे वार्ताकार बीते एक साल से नाफ़्टा संधि को एक बार फिर से ड्राफ़्ट कर रहे थे.
लेकिन बीते पांच हफ़्तों से कनाडा ने इस मुद्दे पर चल रही चर्चा में हिस्सा नहीं लिया है.
ट्रंप ने इस मुद्दे पर कहा है, "हम ये देखेंगे कि कनाडा को इसमें शामिल करें या कनाडा के साथ एक अलग डील करें."
ट्रंप ने कनाडा को निर्यात होने वाली कारों पर शुल्क लगाने की बात कहकर कनाडा को चेतावनी दी है.
ट्रंप ने ये भी कहा है कि वह 'नाफ़्टा' नाम से मुक्ति चाहते हैं क्योंकि नाफ़्टा नाम से अशुभ संकेत भी मिलते हैं. रूडो के दफ़्तर ने इस बातचीत पर बयान जारी किया है जिसके मुताबिक़ दोनों नेताओं के बीच काफ़ी 'रचनात्मक बातचीत हुई है.'
और 'इस हफ़्ते समझौते से जुड़ी बातचीत के लिए दोनों देशों के दल आपसी सहमति बनाने के उद्देश्य से मिलेंगे.'
इस मुद्दे पर बात करने के लिए कनाडा की एक टीम मंगलवार को अमरीकी टीम से मिलेगी.
ट्रूडो ने मेक्सिको के मौजूदा राष्ट्रपति एनरीक़ पेना निएटो से रविवार को बात की है और दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर एक ऐसे मोड़ पर पहुंचने की बात की है जिसमें तीनों देश शामिल हों. से में ओब्राडोर के राष्ट्रपति बनने के बाद समझौते के लिए स्थितियां जटिल हो सकती हैं.
इस समय सीमा में समझौते को पूरा करने के लिए ट्रंप प्रशासन को अमरीकी कांग्रेस के सामने इस समझौते का नया प्रारूप 90 दिन पहले देना होगा और इसके लिए आख़िरी दिन आगामी शुक्रवार है.
हालांकि, निर्वाचित राष्ट्रपति ओब्राडोर ने सोमवार को कहा है कि अमरीका के साथ द्विपक्षीय समझौता सिर्फ़ इस नई संधि की ओर पहला कदम है.
ओब्राडोर कहते हैं, "हम इस बात के इच्छुक हैं कि ये संधि पहले की तरह तीन देशों वाली संधि रहे और फ़्री ट्रेड अग्रीमेंट की रूपरेखा वही होनी चाहिए जिस तरह ये सामने आया था"
कनाडा की विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ़्रीलैंड के प्रवक्ता एडम अस्टन ने कहा है कि अमरीका और मेक्सिको के बीच इस मुद्दे को लेकर जो प्रगति हुई है उससे कनाडा काफ़ी उत्साहित है.
लेकिन उन्होंने ख़ास मुद्दों को लेकर टिप्पणी नहीं दी है.
अमरीका और कनाडा बीते काफ़ी समय से व्यापार के मुद्दों पर आमने-सामने हैं.
इनमें एक वजह कनाडा द्वारा अपनी डेयरी इंडस्ट्री को संरक्षण दिया जाना और अमरीका द्वारा अपने इस्पात और एल्यूमीनियम क्षेत्र को संरक्षण दिया जाना शामिल है.
प्रवक्ता एडम अस्टन कहते हैं, "हम नए समझौते पर तब हस्ताक्षर करेंगे जब ये कनाडा और मध्यवर्ग के लिए लाभप्रद हो और कनाडा के हस्ताक्षर की ज़रूरत हो."
ट्रंप के साथ टेलीविज़न पर मेक्सिको के राष्ट्रपति के साथ दिखाई गई फ़ोन वार्ता में निएटो ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि इस समझौते में कनाडा का शामिल होना ज़रूरी है.
लेकिन मेक्सिको के विदेश मंत्री लुइस वाइडगारे कहते हैं कि उनका देश अमरीका के साथ द्विपक्षीय डील करने के लिए भी तैयार है.
वॉशिंगटन में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा, "अगर किसी वजह से कनाडा और अमरीका नाफ़्टा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर पाते हैं तो हमें पहले से पता है कि मेक्सिको और अमरीका के बीच एक दूसरी डील हो जाएगी."
नाफ़्टा के तहत हर साल तक़रीबन एक खरब अमरीकी डॉलर का व्यापार होता है.
इस नए समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल ट्रेड और निवेशकों से जुड़े विवादों के लिए प्रस्ताव शामिल किए गए हैं.
अमरीका ने इस मुद्दे पर कहा है कि मेक्सिको के साथ हुए शुरुआती समझौते में दोनों देश इस बात पर राज़ी हुए हैं कि टैक्स फ़्री दर्जा हासिल करने के लिए किसी भी उत्पाद का 75 फ़ीसदी हिस्सा दो देशों में बनना चाहिए जो कि वर्तमान संधि से ज़्यादा है.
कारों को लेकर ये तय हुआ है कि प्रत्येक कार का 40 से 45 फ़ीसदी हिस्सा उन कामगारों द्वारा बनाया जाना चाहिए जो कि कम से कम 16 डॉलर कमा रहे हों.
इस प्रस्ताव का उद्देश्य ये है कि कंपनियां मेक्सिको के उन क्षेत्रों में अपने प्लांट लेकर जाएं जहां पर मज़दूरी दर कम है.
अमरीका ने कहा है कि ये समझौता आने वाले 16 सालों तक ठीक रहेगा.
दोनों देश इस बात पर राज़ी हुए हैं कि हर छह सालों में इस समझौते की समीक्षा की जानी चाहिए.
लेकिन इस समीक्षा के साथ स्वत: निरस्तीकरण का जोख़िम नहीं होगा जैसा अमरीका ने प्रस्ताव दिया था.

Sunday, August 26, 2018

图说:中国大规模的海外投资计划

过去一年里,中国大举进军海外,资助成立了诸如亚洲基础设施投资银行( )等新的金融机构,挑战了所谓的布雷顿森林体系。在“一带一路”战略的指引下,又宣布了一系列重大的贸易、投资与资源开采行动计划。

亚投行的成立反映出中国难以在世界银行和世界货币组织( )等国际组织中施展拳脚,而这些国际组织的影响力正日渐式微。“一带一路”战略则不仅显示出中国新的强硬外交政策,还表现出中国希望进入新常态,将部分过剩的产能转移到新市场的愿景。所谓“新常态”是指中国希望在一段时期的经济增长放缓后实现结构性转型,走上更优质、可持续的发展道路。

在这个风云变幻的全球经济形势下,中国经济的放缓对大宗商品市场产生了重大影响。中英两国最有影响力的两个智库发布了一份最新研究报告,探讨了中国在全球 治理中愈发重要的地位,并为各国决策者提出了若干建议,以便它们了解日益活跃的中国在能源、金属和矿产领域中扮演的角色。这张地图显示了中国“新丝绸之路”计划的广度和规模,其中包括广泛的运输和海陆物流环节。这些将促使在中国及亚洲其他地区之间以及与欧洲和非洲更加频繁的原材料和制成品贸易。

查塔姆研究所和国务院发展研究中心共同发布的《引领新常态:中国与全球资源治理》指出,目前疲软的市场价格削减了资源紧张的压力,这或将给国际治理改革带 来“机会窗口”。此外,作为今年G20峰会主席国,又是世界第一消费大国和资源贸易国,随着其全球影响力日益增强,中国被寄予期望推动实现更高效的全球资 源治理。

中国该怎么做?报告建议中国扮演更为积极的角色:主持高级别对话;与生产国展开磋商,防止产生破坏双方利益的出口限制;帮助新兴经济体发展完善资源贸易争端“预警”机制。

报告还建议中国考虑加入《采掘业透明度行动计划》(EITI),从而证明中国企业内部管理符合国际最佳实践,并且建议中国厂家在践行国家新丝绸之路政策的过程中加强环境监测和报告制度。

更多建议及信息请详见在线报告,此处可下载英文和中文版本。上图再现了该报告一带一路规划图:该图不仅能够帮助您更好地了解中国新的贸易和投资规划及其对能源和资源影响,还涵盖了密切相关的水文和森林数据。亚投行的成立反映出中国难以在世界银行和世界货币组织( )等国际组织中施展拳脚,而这些国际组织的影响力正日渐式微。“一带一路”战略则不仅显示出中国新的强硬外交政策,还表现出中国希望进入新常态,将部分过剩的产能转移到新市场的愿景。所谓“新常态”是指中国希望在一段时期的经济增长放缓后实现结构性转型,走上更优质、可持续的发展道路。

在这个风云变幻的全球经济形势下,中国经济的放缓对大宗商品市场产生了重大影响。中英两国最有影响力的两个智库发布了一份最新研究报告,探讨了中国在全球 治理中愈发重要的地位,并为各国决策者提出了若干建议,以便它们了解日益活跃的中国在能源、金属和矿产领域中扮演的角色。

面对环境恶化和气候变化,中国大力发展“新常态”下的“生态文明”。报告指出,全球经济也面临着同样的新常态。在此背景下,该图的意义愈发重大

Wednesday, August 15, 2018

《台湾旅行法》通过后 蔡英文再度过境美国有何“突破”

英文于台湾时间8月12日到20日率团出访,展开“同庆之旅”。这是她任内第五度出访,其中四次过境美国。她受邀至巴拉圭参加阿布铎(
中国官媒《环球日报》七月在蔡英文公布将出访时,就发布报道,称蔡英文在美国会面何种层级的官员,是否会“联美制陆”,“都会影响大陆下一步针对台湾的行动。”
《环球时报》报道称,按照不成文的规定,台湾总统过境美国时,一般不能到访首都华盛顿。地点可以政治影响力划分为四等,第一等是纽约和波士顿,第二等是有大批华人聚居的洛杉矶、旧金山,第三等是迈阿密、西雅图和休斯敦,虽然不是美国政治经济中心,但依然是本土大城市,最末等就是阿拉斯加、夏威夷和关岛等。
蔡英文任内出访,此前有三次过境美国,停留城市包括迈阿密、洛杉矶、休斯敦、旧金山、檀香山及关岛,但至今未从政治敏感度高的纽约、波士顿等东岸城市过境。
台湾前总统陈水扁2001年、 2003年出访时曾过境纽约,但当时他与美国政府因为台湾主体性的认知不同,台美关系转差,2007年陈水扁出访中南美洲时,只在阿拉斯加停留加油,陈水扁当时没有下飞机。
中美洲地区9个伯里兹(台湾称贝里斯)、萨尔瓦多、危地马拉(瓜地马拉)、海地、洪都拉斯(宏都拉斯)、尼加拉瓜、圣卢西亚(圣露西亚)、圣基斯和尼维斯(圣克里斯多福及尼维斯)、圣文森特和格林纳丁斯(圣文森)
南美洲地区1国:巴拉圭
大洋洲地区6国:帕劳(帛琉共和国)、马绍尔群岛、基里巴斯(吉里巴斯)、瑙鲁(诺鲁共和国)、所罗门群岛(索罗门群岛)、图瓦卢(吐瓦鲁国)
非洲地区1国:斯威士兰(史瓦济兰)
欧洲地区1国梵蒂冈(教廷)
又译阿布多)总统就职典礼,接着赴贝里斯(伯利兹)会见该国政要,去程过境美国洛杉矶,回程将过境休斯顿。
根据中华民国侨务委员会消息,蔡英文此次过境美国,有三项突破,一是以中华民国元首身份到中华民国官方驻美单位参访,二是参访美国联邦机构,三是以往过境期间新闻采访的管制全面解除。
蔡英文于美西时间12日中午抵达洛杉矶,美国在台协会(AIT)主席莫健(James Moriarty) 、驻美代表高硕泰接机。蔡英文当地时间12日晚间举行侨宴,台湾《联合报》发自洛杉矶的报道称,近日台湾东亚青运主办权被取消、航空公司被中国要求改名等事件,让侨胞感到不平,因此积极欢迎蔡英文到访,侨宴出席人数达千人,规模是历年最大。
但在台侨内部有不同声音,一些亲国民党的台侨组织反蔡英文到访活动。也有消息指出,中国领事馆将组织抗议行动。对此随团出访的前高雄市长、现任总统府秘书长的陈菊表示,这是民主的过程,将以平常心对待。
根据台湾《中央社》报道,蔡英文在总统专机上广播称:“过境美国期间,我们也会与许多老朋友、新朋友,交换国际局势的想法与意见。”洛杉矶时间13日上午,蔡英文的行程安排包括:与美国政界友人进行早餐会,之后参访里根图书馆(雷根图书馆)并发表公开谈话,这是蔡英文首度在美国发表公开讲话。蔡英文13日傍晚离开洛杉矶前,还会再会晤一些美国政要。
侨务委员会称,台美关系在《台湾旅行法》、《国防授权法》之下升温,有多位美国国会议员邀请蔡英文赴国会参访并发表演说,但台湾总统府称,考量中美贸易战僵持、区域情势紧张等外部因素,此次出访不过境敏感的东岸城市,以降低政治性成份以避免无法预期的风险。
陈菊在蔡英文出访巴拉圭、贝里斯期间,将留在美国,代表蔡英文走访旧金山、盐湖城、凤凰城等地慰问侨胞,再与蔡英文于休斯顿会和,蔡英文预计在休斯顿停留27小时。

Thursday, July 26, 2018

可再生能源配额新政可用于支持可再生能源投资

三月,中国颁布了《可再生能源电力配额及考核办法(征求意见稿)》,规定了各省级行政区域水电和非水可再生能源电力消费的比重指标,并将这些指标进一步向承担配额义务的市场主体,包括电网企业、配售电企业和参与直购电交易的大型终端用户,进行分配。

用户可通过购买可再生能源电力证书(REC)作为其履行义务的证明。证书对可再生能源电力的生产者按照1兆瓦时电量一个证书的标准核发。证书将区分为含水电和非水电可再生能源(风能、太阳能、生物质能)。年底持有证书数量不足的用户,须按照电网企业建议的并在国家发改委备案的价格购买替代证书

在我们看来,可再生能源电力配额新规有很多好处。

配额义务

很重要的一点,可再生能源电力配额义务现在已具备法律效力。未达到配额指标的省份将暂停获批建设新的煤电项目规模(或核减核准规模),并且还将被取消申请能源示范区的资格。对于未完成配额指标的电力配售企业等市场主体,将核减或取消其下一年参与电力市场交易的资格。
从长远来看,可再生能源电力配额有助于促进各省之间的可再生能源交易。配额增幅最大的省份多数都位于华东地区。例如,2016年湖南省风电和太阳能光伏发电量总占比2.9%。根据2018年的配额指标,湖南非水电可再生能源发电占比需达到9%,并在2020年增长到19%。

安徽、河南和江西的情况类似。就绝对增幅而言,山东、河南和安徽需购买风电和光伏发电的增幅最大。尽管已计划增加省间交易量,但可再生能源电力配额政策可以使通过跨省交易整合可再生能源的重要意义得到强化。总体而言,实施省级可再生能源电力配额政策是一个积极的进展,可帮助纠正此前中国清洁能源发展模式中的若干问题。在国家层面,以发电量而非装机容量作为基础的政策目标已经成为推动可再生能源并网的重要因素。对不履行义务的主体建立惩罚机制,可以促进各省购入更多的清洁能源,而非仅仅依靠省内发电,从而减少可再生能源弃电现象。
但任何一项新政策都会在发展过程中存在阵痛期,并有潜在需要改善的地方,尤其是在2020年后中国的可再生能源补贴将逐步退出。因此,为促进可再生能源电力配额政策的发展,我们提出了如下一些简单易行的方法:
  • 明确配额政策将如何支持其他对可再生能源产生影响的改革,如碳市场和电力市场改革。
  • 提高配额制定方法的透明度,并为配额制定长期规划以鼓励在可再生能源领域的投资。
  • 提出月度目标以鼓励市场发展,帮助市场主体保持在履行配额义务的轨道上。
  • 阐明可再生能源电力配额政策的目标,并将这一目标与解决弃风、弃光与弃水的问题结合起来。
  • 鼓励可再生能源直购电,以及购买盈余的可再生能源电力证书。

​市场协同机制研究

任何新的市场机制都应有助于中国实现电力市场改革和清洁能源政策的长期目标。市场的扩展、补贴和行政规划机制并存的现象都可能加剧市场改革的复杂性,从而增加实施的难度。去年国际能源署(IEA)在一份政策文件中指出,政策叠加“可能造成政策重复、成本增加、低效和政策清晰度降低等问题”。

然而,IEA也指出,“如果政策想要达成的目的不同,如长期和短期目标,那么出现政策叠加也是合乎情理的。”这就是为什么每项政策都需要明确其主要目标,并辅以相应的配套机制。

我们认识到政策叠加是不可避免的。存在这个问题时,政策制定者应制定整合计划,逐步协调不同的政策。最需要进行协调的是碳市场、电力现货市场、电力辅助服务市场、分布式光伏市场以及空气污染政策。其中很多改革都将提高可再生能源上网电量。监管机构应研究这些市场将如何在短期内相互影响,并理清这些政策将如何相互支持。清洁能源发展逐步向市场化运行机制转型的同时,中国不应放弃其制定长期目标的做法,这些做法过去曾成功推动了可再生能源的发展。但是为提升长期市场表现,这些目标需要进行调整。

当前,中央政府设置了可再生能源上网电价(FiT)制度,大多县级和以上各资源区的上网电价每年进行调整。上网电价定价机制中存在的不确定性和清晰度不够等问题导致投资出现了兴衰交替的局面。资源区的过度细分导致风电和太阳能光伏电站并未建在风光条件最佳的资源区,而是建在了补贴高、但资源条件一般的地区。

监管机构应着重于提供清晰的长期投资信号。最近发布的可再生能源电力配额政策中设定了2018年的省级配额指标,而本年度已经过去了数月。政府仅为2020年制定了“预期指标”。而如果要在那时实现并网发电,风电场和太阳能光伏电站现在就需要获得核准。

制定2025年或2030年的目标将使投资者从更大的确定性中获益。目前,可再生能源义务仅仅包括已经纳入计划的部分,并没有使REC证书发挥加速和优化投资的作用。

如果能够提前制定并逐年上调可再生能源发展目标,那么可再生能源电力证书的价格将反映新的投资需求,从而有助于避免高碳技术进入,这有助于从依靠上网电价和其他管理措施上脱离。

当然,有时政策调整是必要的。但调整可能产生破坏性的影响,尤其是当调整成为常态,而非例外情况。我们建议制定定期修订配额的时间表,并阐明需要修订的情况。当供应不足导致价格上涨,投资就会增加,可再生能源电力配额政策就会奏效。因此,供应短缺时,监管机构不应急于调整下一年的目标,因为这可能会导致矫枉过正从而减少投资。

建立月度目标​

尽管设置行政目标的达标期限是必要的,但它同时会带来预期之外的问题。上网电价每年调整一次,导致每年在调整日期前后市场出现起伏波动。空气质量指标以三年为期限,导致最后一年的12月会出现供热不足。而省级碳市场试点只有在年终结算义务到期之前变得活跃。

在第一年试运行后,即可再生能源电力证书仅能交易一次(从2019年1月至2月),我们建议开放全年交易的市场,从而使市场主体看到交易价格并作出相应的反应,而不是到了年底才仓促完成配额。

我们建议监管机构制定指导方针,按月对每兆瓦时电力需求所对应购买的配额目标提出建议。由于风电和太阳能光伏发电量每月都会发生波动,因此,该方案中已经设立的替代证书“安全阀”可以由每年调整改为按月调整。​

此外,一个活跃的月度交易市场将有助于决策者监测可再生能源电力配额政策落实的进展。如果证书一直处于不足或过量状态,政策制定者可以通过完善市场规则来提高流动性。如果明显的供应不足或过量发生在几年的时间跨度内,他们可以通过设定一个未来的目标的进行纠正。

由于目前政策不允许转售,并且看起来一段时期内也不会允许,那么买家在月度市场上买入配额时就会非常谨慎,因为一旦买入过多,将无法转售。因此,我们建议为在最初的2019年设定每月约25%的购买目标,并将该目标到2020年提高到40-50%。这将有助于证书买家作出更加积极的购买决策。

减少弃电现象​

该政策的既定目标是推进生态文明建设,落实国家可再生能源法。中国此前计划在2020年将所有省份的弃风、弃光率控制在5%以下,现在可以以此为契机将可再生能源电力配额政策与之前的计划联系起来。我们认为,当前设定的配额目标在不大幅度降低弃电率的情况下也能够实现。考虑到可再生能源资源大省在两年内要将弃电率从30%以上降至低于5%,配额目标甚至可以说是过于保守。我们建议,目前针对可再生能源电力证书市场初级阶段(2018-2020)所用的目标计算公式中,应涵盖降低弃电的目标。

最终,要完成弃电目标需要增加跨省间的交易。因为在弃电最严重的省份,发电量远远超过其省内需求,但其他省级政府宁愿依靠省内的发电量。即使对于需要购入能源的省份,由于电力调度制度的规定,能够并入电网的可再生能源电力也仅有40%左右

配额政策通过设定可再生能源购买目标,可以帮助解决各省的保护主义问题。而当前的目标似乎假定没有计划外的跨省交易增长。未来几年,可再生能源电力配额可能会对调度和电力系统工程施加一定的正向压力,从而使中国有能力处理超过40%的跨省可再生能源交易。​

当前公布的2018年配额似乎较为保守,可能是为了使政策在推出之初更容易实施。我们认为当前目标过“松”,如果配额目标很容易达到,实际上可能会使市场发展更加复杂。

要确定有多少目标需要被修订,很重要的一点是要清楚知道设定目标时所使用的数据。我们建议公布今后两年各省份配额的基本计算公式。这也将有助于省级电力调度中心明确他们需要采取何种措施来实现这些目标,鉴于电力市场不断变化,这一点尤其重要。

鼓励直接购买​

可再生能源电力配额新政与去年颁布的绿色电力证书自愿认购政策不同。绿色电力证书政策旨在通过鼓励私营企业购买证书,作为其消费绿色电力的凭证,从而降低上网电价补贴资金缺口。通常情况下,绿色电力证书销量几乎为零,因而这个政策并未对减少上网电价补贴资金缺口做出重大贡献。

绿色电力证书市场没有起到作用的主要原因是实际上证书并不符合大多数企业的需要。大多数环境机构在评价企业履行环境承诺时重点考察的是“额外性”问题:当一家公司号称绿色环保时,他们是否采取了实际行动,为系统带来了比通常情况下更多的清洁能源?

中国的绿色电力证书与其说是对新能源的投资,倒不如说更像是向政府纳税。矛盾的是,该计划促使那些支持绿色理念的跨国公司转向在中国以外的其他国家发展可再生能源。例如,富士康近期宣布将在沙特阿拉伯投资兴建一个新的大型太阳能项目。 我们认为,新的配额政策最终可以吸纳绿色电力证书市场,特别是由于目前的配额政策更能切合企业需求。为了帮助实现这一转变,我们建议允许寻求碳排放尽早达峰的企业和城市自愿购买超出省级配额的可再生能源电力证书。

我们还建议允许企业与配额体系之外的可再生能源发电商达成直接购买协议。这样一来,市场将鼓励更多的可再生能源投资,从而有助于降低风电和光伏的价格并加速中国的清洁能源转型。

结论

中国正全力打造清洁能源未来,同时也取得了与其他很多国家相比非常显著的成绩。作为当今全球具有领先地位的可再生能源生产国和消费国,中国清洁能源生产行业的规模升级有助于促进全球能源转型。可再生能源电力配额政策也将继续支持此目标,中国为一个可以逐渐推动可再生能源投资和生产的市场奠定了基础。我们希望以上几条建议可以为变革提供一个起点。